दोस्तों आज का टॉपिक है की आउटपुट devices क्या होत्ती है और उनका प्रयोग किन किन जगहों पर होता है तो चलिए दोस्तों आज के टॉपिक में बताते है की computer के आउटपुट device क्या होती है
computer में आउटपुट device क्या होता है ?
आउटपुट युक्तियाँ (Output Devices)-
आउटपुट युक्ति का प्रयोग सीपीयू से प्राप्त परिणाम को देखने अथवा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। आउटपुट युक्ति, आउटपुट को हार्ड कॉपी अथवा सॉफ्ट कॉपी के रूप में प्रस्तुत करती है। सॉफ्ट कॉपी वह आउटपुट होता है, जो उपयोगकर्ता को कम्प्यूटर के मॉनीटर पर दिखाई देता है अथवा स्पीकर में सुनाई देता है। जबकि हार्ड कॉपी वह आउटपुट होता है, जो उपयोगकर्ता को पेपर पर प्राप्त होता है। कुछ प्रमुख आउटपुट युक्तियाँ निम्न हैं जो आउटपुट को हार्ड कॉपी या सॉफ्ट कॉपी के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
कुछ आउटपुट डिवाइसो के नाम हम आपको यहाँ बता रहे है
मॉनीटर (Monitor)
मॉनीटर को विजुअल डिस्प्ले युक्ति (Visual Display Device –VDC) भी कहते हैं। मॉनीटर सीपीयू से प्राप्त परिणाम की सॉफ्ट कॉपी के रूप मे दिखाता है। मॉनीटर पर चित्र छोटे-छोटे बिन्दुओं (Dots) से मिलकर बनता है। इन बिन्दुओं को पिक्सल (Pixels) के नाम से भी जाना जाता है। किसी चित्र की स्पष्टता (Clarity) तीन तथ्यों पर निर्भर करती है
(i) स्क्रीन का रेजल्यूशन (Resolution of Screen)
(ii) डॉट पिच (Dot pitch)
(iii) रिफ्रेश रेट (Refresh Rate)
एल सी डी (Liquid Crystal Display – LCD)
एक प्रकार की अधिक प्रयोग में आने वाली आउटपुट युक्ति है। यह CRT की अपेक्षा हल्की, किन्तु महँगी आउटपुट युक्ति है। इसका प्रयोग लैपटॉप में, नोटबुक में, पर्सनल कम्प्यूटर में, डिजिटल घड़ियों आदि में किया जाता है। LCD में दो प्लेट होती हैं। इन प्लेटों के बीच में एक विशेष प्रकार का द्रव (Liquid) भरा जाता है। जब प्लेट के पीछे से प्रकाश निकलता है, तो प्लेट्स के अन्दर के द्रव एलाइन (Align) होकर चमकते हैं, जिससे चित्र दिखाई देने लगता है।
एल ई डी (Liquid/Light Emitted Diode – LED)
यह मॉनिटर आजकल घरों में टेलीविज़न की तरह प्रयोग किया जाता है इसके अन्दर छोटे – छोटे LEDs (Light Emitted Diodes) लगे होते हैं। जब विद्युत धारा इन LEDs से गुजरती है, तो ये LED चमकने लगते हैं और चित्र LED के स्क्रीन पर दिखाई देने लगता है।
3D मॉनीटर-
3D मॉनीटर का प्रयोग आउटपुट को तीन डायमेंन्शन (Three Dimension – 3D) में देखने के लिए करते हैं।
टी एफ टी (Thin Film Transistor – TFT)
TFT में एक पिक्सल को कण्ट्रोल करने के लिए एक से चार ट्रांजिस्टर लगे होते हैं। ये ट्रांजिस्टर पैसिव मैट्रिक्स की अपेक्षा स्क्रीन को काफी तेज, चमकीला एवं ज्यादा कलरफुल बनाते हैं। TFT अन्य मॉनीटर्स की अपेक्षा महँगा, लेकिन काफी अच्छी क्वालिटी का चित्र डिस्प्ले (Display) करने वाला आउटपुट युक्ति है।
प्रिण्टर्स (Printers)-
प्रिण्टर्स एक प्रकार का आउटपुट युक्ति है। इसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त डेटा और सूचना को किसी कागज पर प्रिण्ट करने के लिए करते हैं। यह ब्लैक और व्हाइट (Black and White) के साथ-साथ कलर डॉक्यूमेण्ट को भी प्रिण्ट कर सकता है। किसी प्रिण्टर की गति कैरेक्टर प्रति सेकण्ड (Character Per Second – CPS) में, लाइन प्रति मिनट (Line Per Minute – LPM) में और पेजेस प्रति मिनट (Pages Per Minute – PPM) में मापी जाती है। किसी प्रिण्टर की क्वालिटी डॉट्स प्रति इंच (Dots Per Inch –DPI) में मापी जाती है।
प्लॉटर (Plotter)-
प्लॉटर एक आउटपुट युक्ति है, जिसका प्रयोग बड़ी ड्राइंग या चित्र जैसे की कंस्ट्रक्शन प्लान्स (Construction Plans), मैकेनिकल वस्तुओं की ब्लू प्रिंट, AUTOCAD, CAD/CAM आदि के लिए करते हैंl इसमे ड्राइंग बनाने के लिए पेन, पेन्सिल, मार्कर आदि राइटिंग टूल का प्रयोग होता है। प्लॉटर मुख्यत: दो प्रकार के होते है-
(i) फ्लैट बैड प्लॉटर (Flat Bed Plotter)
(ii) ड्रम प्लॉटर (Drum Plotter)
हेड फोन्स (Headphones) -
इस युक्ति को सिर पर बेल्ट की तरह पहना जा सकता है, जिससे दोनों स्पीकर मनुष्य के कान के ऊपर आ जाते हैं। इसलिए इसकी आवाज सिर्फ इसे पहनने वाला व्यक्ति ही सुन सकता है। किसी-किसी हेड फोन के साथ माइक भी लगा होता है, जिससे सुनने के साथ-साथ बात भी की जा सकती है। इस उपकरण का प्रयोग प्राय: टेलीफोन ऑपरेटरों, कॉल सेण्टर ऑपरेटरो, कमेण्टेटरों द्वारा किया जाता है। इसे स्टीरियो फोन्स या हेड सेट के नाम से भी जाना जाता है।
स्पीकर (Speaker)-
यह एक प्रकार की आउटपुट युक्ति है, जो कम्प्यूटर से प्राप्त आउटपुट को आवाज के रूप में सुनाती है। यह कम्प्यूटर से डेटा विधुत धारा (Electric Current) के रूप में प्राप्त करता है।
प्रोजेक्टर (Projector)-
इस डिवाइस का प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त सूचना या डेटा को एक बड़ी स्क्रीन पर देखने के लिए करते हैं। इसकी सहायता से एक समय में बहुत सारे लोग एक समूह में बैठकर कोई परिणाम देख सकते हैं। इसका प्रयोग क्लास रूम, ट्रेनिंग या एक बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल जिसमें ज्यादा संख्या में दर्शक हों, जैसी जगहों पर किया जाता है।


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