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08 December 2018

मांग (डिमाण्ड) ड्राफ्ट कैसे भरते हैं? How to Fill/Demand Draft ?


मांग (डिमाण्ड) ड्राफ्ट कैसे भरते हैं?
(How to Fill/Demand Draft) 

यदि आपको 40,000/- रूपये का डिमाण्ड ड्राफ्ट बनाना है तो इसके लिए बैंक जाकर एक फॉर्म (Form) भरना होगा, जिसमें डिमाण्ड ड्रॉफ्ट से सम्बन्धित आवश्यक सूचना (Essential details) भरनी होगी। डिमाण्ड ड्रॉफ्ट जितने राशि का बनाना है, उसका भुगतान (payment) नकद या चेक के रूप में करना होगा। यदि आप भुगतान चेक (cheque) के रूप में करते हैं तो फॉर्म में चेक नम्बर लिखना होगा। डी.डी. फॉर्म पर, जिसके पक्ष में भेजना है, वह भरें तथा अपने हस्ताक्षर करें। भरने के बाद डी.डी. को चेक या नकद के साथ संलग्न कर पदधारी बैंक कर्मचारी (Designated Bank Employee) को सौप दें। फिर वह आपको पावती पत्र (Receipt) देगा। बैंक कुछ राशी कमीशन के रूप में लेती है, जो आपके खाते से कटेगा अथवा आप कैश में भुगतान करेंगे।

मांग (डिमाण्ड) ड्राफ्ट कैसे भरते हैं (How to FillDemand Draft)

                      मांग (डिमाण्ड) ड्राफ्ट कैसे भरते हैं?
                                           (How to Fill/Demand Draft) 



How to Fill/Demand Draft ?

If you have to make a demand draft of Rs 40,000 / - then you will have to go to the bank and fill out a form in which the necessary information related to the demand draft will be filled. The amount required to make the demand draft is to be paid in cash or in the form of checks. If you pay as check (check) then the check number will be written in the form. D.D. Fill the form on which to send, and sign it. After filling D.D. Assign to the Designated Bank Employee by attaching it with check or cash. Then he will give you the receipt. The bank takes some amount as commission, which will be deducted from your account or you pay in cash.

WHAT IS PERMANENT ACCOUNT || WHAT IS CURRENT ACCOUNT | WHAT IS CASH CREDIT ACCOUNT

स्थायी खाता (Permanent Account):

अमेरिका में इसे मियादी जमा (Time deposit) कहा जाता है।  इस खाते में एक निश्चित अवधि के लिए रकम जमा की जाती है। स्थायी खाता बचत खाता की तुलना में अधिक ब्याज देता है। जितने समय के लिए रकम जमा की गई है, उतना समय बीत जाने पर ही निकासी हो सकती है।
निश्चित अवधि के भीतर ही निकासी करना आवश्यक हो जाता है, तब स्थायी जमा की जमानत पर कर्ज मिल जाता है। खाता पहले बन्द करने पर, जिस शर्त पर रुपया जमा किया गया था, उसका पालन नहीं होता। ब्याज उस समय जो रहता है, वही मिलता है। 

चालू खाता (Current Account):

इस खाते में जमा करने वालों को अधिकार है कि वे अपनी इच्छानुसार धन को निकाल सकते हैं एवं जमा कर सकते हैं, इसलिए अमेरिका में इसे माँग जमा भी कहा जाता है। बैंक इस प्रकार के खातों पर जमा हेतु कोई ब्याज नहीं देते एवं एक निश्चित राशि से कम जमा पर जमाकर्ता से व्यय वसूल करते हैं। 

नकद साख खाता (Cash Credit Account):

यह एक ऋण खाता है। इस खाते के अन्तर्गत बैंक खाताधारी को एक निश्चित मात्रा तक ऋण प्राप्त करने का अधिकार देता है। इसी सीमा के अन्दर ऋणी अपनी आवश्यकतानुसार बैंक से रुपया लेता है और जमा भी करता है। ब्याज उसी राशि पर वसूल किया जाता है, जो वास्तव में ऋणी के पास रहती है। 

आवर्ती जमा खाता (Recurring Deposit Account):

इस प्रकार के खातों में, एक निश्चित राशि प्रतिमाह, एक निश्चित अवधि के लिए जमा कराई जाती है। बिना किसी असाधारण परिस्थिति के इसमें से रकम को, निश्चित अवधि के पूर्ण होने से पहले निकाला नहीं जा सकता। इन पर दिया जाने वाला ब्याज, जमा खाते की तुलना में अधिक होता है। 
ऋण (Loan):
वाणिज्यिक बैंक का अन्य महत्वपूर्ण कार्य ऋण देना है। बैंक अपने ग्राहकों, उत्पादकों व व्यापारियों आदि को विभिन्न प्रकार की जमानतों पर ऋण देते हैं, ये ऋण अचल सम्पतियाँ, व्यक्तिगत जमानत के आधार पर नहीं दी जाती। वाणिज्यिक बैंक निम्नलिखित प्रकार के ऋण देते हैं-
(a) ओवर ड्राफ्ट (OD) - चालू खाता वाले जमाकर्ता को उनके खाते में जमा रकम से अधिक राशि निकालने की सुविधा।
(b) ऋण तथा अग्रिम (Debt and Loan)
(c) विनिमय-पत्रों की कटौती (Retrenchment of Exchange Bills)
(d) नकद (Cash Credit)
(e) सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश (Investment in Public Securities) 
ऋण एवं ओवरड्राफ्ट के प्रकार (Types of Loan and Overdrafts):
ऋण लेने की परम्परा भारतीय समाज में प्राचीन काल से ही रही है। किसी भी व्यक्ति द्वारा ऋण तब लिया जाता है, यदि उसे घर खरीदना हो, उच्च शिक्षा प्राप्त करनी हो, गाड़ी खरीदनी हो इत्यादि। ऋण आर्थिक क्रियाकलापों के लिए भी दिया जाता है। यथा- कृषि के क्षेत्र में, व्यावसाय स्थापित करने के क्षेत्र में एवं सेवा क्षेत्र से सम्बन्धित व्यावसाय इत्यादि में बैंक द्वारा ऋण बहुत न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराया जाता है। 
भारत में लोन तीन प्रकार के दिए जाते हैं-
1. अल्पकालिक लोन (ऋण) (Short term loan) - यह ऋण (लोन) एक वर्ष से कम अवधि के लिए दिया जाता है।
2. मध्यकालिक (Medium term loan) —एक वर्ष से तीन वर्ष की अवधि के बीच के लिए दिया जाता है।
3. दीर्घकालिक लोन (Long term loan)- यह ऋण तीन वर्ष से ऊपर की अवधि के लिए दिया जाता है।
1. होम लोन (Home Loan):
घर से सम्बन्धित जो लोन लिया जाता है, सामान्यतय: होम लोन कहा जाता है। इसके अन्तर्गत घर खरीदना, घर बनाना, घर का पुनर्निमाण (Renovation) इत्यादि आता है। यह लोन निर्धारित ब्याज दर पर दी जाती है। बैंक कुल लागत का 75 से 80% तक ऋण देती हैं। लोन चुकाने की अवधि 5 वर्ष से 20 वर्ष तक हो सकती है। 
2. व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan):
किसी व्यक्ति द्वारा अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए लिया गया लोन, व्यक्तिगत लोन कहलाता है। यह लोन मुख्यत: कर्ज चुकाने के लिए, चिकित्सा उपचार के लिए, बच्चों की फीस भरने के लिए, यात्रा के लिए तथा विवाह सम्बन्धी गतिविधि इत्यादि के लिए लिया जाता है। व्यक्तिगत लोन का ब्याज दर प्रत्येक बैंक का अलग-अलग होता है। यह लोन किसी व्यक्ति के व्यवसाय या पेशा के आधार पर दिया जाता है। व्यक्तिगत लोन चुकाने की अधिकतम अवधि 4 वर्ष तक होती है। 
3. शिक्षा ऋण (Education Loan):
यह लोन विशेषकर उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक अध्ययन के लिए दिया जाता है। यह लोन लेने के लिए गारण्टर (Guarenter) की आवश्यकता होती है, जो अभिभावक या कोई रिश्तेदार हो सकता हैं। यह देश के अन्दर एवं बाहर (Abroad) दोनों के लिए दिया जाता है। सामान्यत: देश के अन्दर पढ़ने के लिए दस लाख तथा विदेशों में पढ़ने के लिए बीस लाख दिया जाता है। 
4. कॉर्पोरेट लोन (Corporate Loan):
जब बैंक बड़े व्यावसायिक कम्पनियों को ऋण देती है तो वह कॉर्पोरेट लोन कहलाता है। कोई भी बैंक अपने अपने कोर कैपिटल (Core Capital) का 55% तक किसी बड़ी कम्पनी को लोन दे सकती है। 
5. वाहन या कार लोन (vehicle & Car Loan):
व्यक्ति पुरानी या नई (old & new) गाड़ी खरीदने के लिए बैंक से जो लोन लेता है, वह वाहन या कार लोन कहलाता है। कार लोन के सन्दर्भ में प्रत्येक बैंक की ब्याज दर अलग-अलग होती है। इस ऋण को चुकाने के लिए बैंक ग्राहकों को EMI (Equated Monthly Installments) की सुविधा देती है या कोई ग्राहक चाहे तो समय से पूर्व भी लोन को चुका सकता है। 
6. गोल्ड लोन (Gold Loan):
गोल्ड लोन बैंक में सोना रखने के बदले में नकद (cash) लेने की प्रक्रिया है। यहाँ लोन लेन के लिए बैंक में सिक्योरिटी (security) के रूप में सोना रखना होता हैं। इस लोन पर लिया गया ब्याज दर पर्सनल लोन की तुलना में कम होता है। इस सन्दर्भ में प्रत्येक बैंक की ब्याज दर अलग-अलग होती है। 
7. टर्म लोन (Term Loan):
यह लोन निर्धारित समय अवधि के लिए एवं उपयुक्त (applicable) ब्याज दर पर दिया जाता है। यह लोन अल्पकालिक अवधि (तीन वर्ष तक) तथा दीर्घकालिक अवधि (10 से 15 वर्ष तक) के लिए दिया जाता है। इसके अन्तर्गत ग्राहक को प्रत्येक माह ब्याज की राशि एवं लोन की राशि को बराबर किस्तों (equal installment) में बैंक में जमा करना होता है। 
8. प्रोपर्टी लोन (Property Loan):
प्रोपर्टी लोन वह लोन है, जो बैंक आपकी प्रोपर्टी के कागजात (document) को गिरवी (mortgage) रख के देता है। इस लोन को चुकाने की अवधि अधिकतम 15 वर्ष होती है। प्राय: लोन की रकम/राशि कागजात में अंकित राशि का 40 - 60% होता है। 


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Why Bank is Needed ? क्यों बैंक की जरूरत है?


क्यों बैंक की जरूरत है?
(Why Bank is Needed?)

  क्यों बैंक की जरूरत है?(Why Bank is Needed?)
           क्यों बैंक की जरूरत है?(Why Bank is Needed?)

बैंक (Bank) उस वित्तीय संस्था को कहते हैं जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने के हेतु इन संस्थाओं में जमा करते और आवश्यकतानुसार समय-समय पर निकालते रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्योग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिंग व्यवस्था एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है। राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्त बैंक अन्य काम भी करते हैं जैसे, 
सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषण आदि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना,
अपने ग्राहकों के लिए उनके चेकों का संग्रहण करना,
व्यापारिक बिलों की कटौती करना,
एजेंसी का काम करना,
गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना-देना। 
अत: बैंक केवल मुद्रा का लेन देन ही नहीं करते, वरन् साख का व्यवहार भी करते हैं। इसलिए बैंक को साख का सृजनकर्ता भी कहा जाता है। बैंक देश की बिखरी सम्पति को केन्द्रित करके देश में उत्पादन के कार्यों में लगाते हैं। जिससे पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और उत्पादन की प्रगति में सहायता मिलती है। 
जमा की सुरक्षा (Safety of Deposits):
बैंक को पैसा जमा करने के लिए एक सुरक्षित जगह के रूप में देखा जाता है। यह अव्यावहारिक और जोखिम भरा नकदी के रूप में अपने सभी बचत रखने के लिए है। यह लोगों के पैसे को अक्सर जल्दी भुगतान और सम्पति को सुरक्षित रखने के लिए है।
बैंक एजेण्ट की हैसियत से मुख्यत: निम्न कार्यों को करता है-
विनिमय साध्य साख-पत्रों का भुगतान करना,
ग्राहकों की ओर से रुपये का भुगतान करना,
भुगतानों को प्राप्त करना,
प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय,
रूपये का हस्तान्तरण,
प्रमाण-पत्रों तथा यात्रियों के चेकों को जारी करना,
विदेश विनिमय का क्रय-विक्रय,
निर्णयकर्ता के रूप में कार्य करना,
सुरक्षा सम्बन्धी कार्य।
बैंकिंग उत्पाद (Banking Products):
खातों के प्रकार (Types of Accounts)- ये निम्न प्रकार के होते हैं -
बचत खाता (Saving Account):
इस प्रकार का खाता प्राय: उन व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होता है, जो कभी-कभी तथा बहुत छोटी-छोटी मात्राओं में रुपया जमा करना या निकालना चाहते हैं। 
बचत खाता मुख्यत: निश्चित एवं कम आय वाले गृहस्थों की सुविधा के लिए तथा उनमें धन संचय की प्रवृत्ति जाग्रत करने के लिए खोला जाता है।
इस प्रकार के खातों में से आवश्यकतानुसार, जितनी बार चाहे, रुपया निकाला जा सकता है। इसमें भी जमा की कोई निश्चित अवधि नहीं होती। इस खाते में रकम जमा करने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है, लेकिन जमा की अधिकतम सीमा निश्चित है।

Digital Financial Services ? Why Savings are needed ?


   Digital Financial Services 

डिजिटल वित्तीय सेवाएँ (Digital Financial Services - DFS)  आधारभूत वित्तीय सेवाओं को गरीबों तक नवीनतम तकनीकों-मोबाइल योग्य प्रोग्राम, इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा उपकरण और डिजिटल भुगतान प्लेटफार्म आदि के द्वारा पहुँचा सकती हैं। डिजिटल चैनल ग्राहकों तथा सेवा दाताओं के लिए लागतों में भारी कमी कर सकता है, जिससे दूरस्थ तथा वंचित लोगों तक सेवाएँ पहुँचना सुगम हो जाता है। पूरे विश्व के वित्तीय नियामकों ने यह महसूस किया है कि DFS वित्तीय समावेशन में अहम भूमिका निभा सकती है और साथ ही साथ इसके सम्भावनाओं में वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण बनाने मे लगे हैं। DFS के चैनल 24 × 7 × 365 सेवाएँ प्रदान करते है। 
बचत क्यों  जरुरी है ? (Why Savings are needed?):
आय का वह भाग, जो खर्च नही किया जाता बचत कहलाता है। भविष्य के अनिश्चित होने के कारण कोई भी अशुभ घटना या आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बिना बचत के ऐसी अनिश्चित घटनाएँ बड़ी वित्तीय संकट को जन्म देती हैं। बचत एक व्यक्ति या परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। कुछ वस्तुएँ महँगी होने के कारण मासिक आय से खरीदनी मुश्किल होती है, जिसके लिए प्रति माह आय का कुछ भाग बचत करना अनिवार्य है, ताकि पर्याप्त रकम इकट्ठी की जा सके जैसे- ए.सी., कार, टी.वी. आदि। भविष्य में होने वाले कुछ बड़े खर्चों के लिए भी बचत करना जरूरी है, जैसे-मकान का क्रय, शादी पर व्यय आदि। 
सुरक्षा के लिए (For Safety):
बचत के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कार्य सुरक्षा है। आपातकाल की स्थिति के लिए बचत बहुत महत्वपूर्ण है। हालाँकि नौकरी छूटना, शारीरिक रूप से अयोग्य होना, बीमार होना या इस प्रकार से अन्य भयंकर वित्तीय समस्या की सम्भावना को कोई सोचना नहीं चाहता, पर इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता कि लोगों के साथ अक्सर ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं। बहुत छोटे आपात की स्थिति, जैसे कार रिपेयर भी बचत किए हुए पैसों से पूरा किया जाता है। ऐसा नहीं कि वर्तमान आय को ऐसी स्थित में पूरी तरह से खर्च कर दिया जाता है। 
भविष्य की आवश्यकता के लिए (For Future Needs):
बच्चों की शिक्षा के लिए भी बचत बहुत महत्वपूर्ण है। जीवन का आनन्द लेने के लिए भी बचत जरूरी है। डिज्नी वर्ल्ड की ट्रिप बहुत आनन्ददायक होती है। जब आपको पता होता है कि आपने बचत के पैसों से भुगतान किया है, बजाय इसके कि क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर वर्षों तक उसका भुगतान करते रहें। 
बड़े खर्चो के लिए (For Large Expenses):
जीवन में बहुत ऐसे खर्चे होते हैं, जो बड़े होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए नियमित रूप से बचत जरूरी है। एक विवाहित दम्पति के कुछ सपने होते हैं, जैसे विदेश घूमना, वार्षिक भ्रमण, मकान खरीदना या व्यवसाय/कम्पनी प्रारम्भ करना। 
घर पर नकदी रखने के नुकसान:
(Drawbacks of Keeping Cash at Home)
कुछ लोग नकदी को बैंक में रखने के बजाय घर पर रखने में विश्वास करते हैं। घर पर नकदी रखने के कुछ नुकसान है। 
असुरक्षित (Unsafe):
अपने नकदी को बैंक से निकालकर घर पर रखे। इसमें यह फायदा है कि आपने अपने पैसों को अपने घर पर छुपाकर रख दिया और जब जरूरत हो उसे प्रयोग कर सकते हो। पर नकदी को घर पर रखने का यह नुकसान है कि उसकी चोरी हो सकती है। 
विकास के अवसर खोना:
(Loss of growth Opportunities)
अपने पैसों को घर पर रखने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि हम विकास के अवसर खो देते हैं, क्योंकि इस पर हम कोई ब्याज नही कमा पाते। यदि हम पैसों को बैंक में रखें, तो हमें एक निश्चित रकम ब्याज के रूप में मिलती है, जिसे जरूरत पड़ने पर हम उपयोग कर सकते है। 
कोई साख योग्यता नहीं:
(No Any Credit Eligibility)
साख योग्यता का अर्थ है कि बैंक में बचत के कारण अन्य फायदों का लाभ उठाना, जैसे-डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ATM की सुविधा, ऋण की सुविधा आदि। घर नकदी रखने पर इन सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। 
  
       Why Bank is Needed ? क्यों बैंक की जरूरत है?

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