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02 December 2018

WHAT IS COMPUTER MEMORY

 दोस्तों आज का टॉपिक है कंप्यूटर मेमोरी क्या है ये कितने प्रकार के होते है और साथ ही कंप्यूटर में मेमोरी का क्या महत्व है तो चलिए आपको बताते है की मुख्य मेमोरी क्या होता है | दोस्तों इस टॉपिक को ध्यान से पढ़े

WHAT IS COMPUTER MEMORY ?

WHAT IS COMPUTER MEMORY |

WHAT IS COMPUTER MEMORY ?



WHAT IS COMPUTER MEMORY ?

कम्प्यूटर मेमोरी (Computer Memory)

मेमोरी कम्प्यूटर का वह भाग है, जिसमें सभी डेटा व प्रोग्राम स्टोर किए जाते हैं। मेमोरी मुख्यत: दो प्रकार की होती है-

1. मुख्य मेमोरी (Main Memory) या प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)2. द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory) और ऑग्‌जिलयॉरि मेमोरी (Auxiliary Memory) 

WHAT IS COMPUTER MEMORY( MAIN MEMORY)

1. मुख्य मेमोरी (Main Memory)

इसे आन्तरिक मेमोरी भी कहा जाता है, क्योंकि यह कम्प्यूटर के सी पी यू का ही भाग होती है। प्राइमरी मेमोरी में उस समय चल रहे प्रोग्राम (या प्रोग्रामों) तथा प्रोग्रामों के इनपुट डेटा और आउटपुट डेटा कुछ समय के लिए स्टोर होते हैं। जैसे ही उनकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है, उन्हें हटाकर दूसरे डेटा या प्रोग्राम रखे जा सकते हैं। इस मेमोरी का आकार सीमित होता है, परन्तु इसकी गति बहुत तेज होती है, ताकि जब भी किसी डेटा की जरूरत होने पर डेटा, इसमें से तुरन्त लिया जा सके। प्राइमरी मेमोरी को दो भागों में बाँटा जा सकता है- 
WHAT IS COMPUTER MEMORY


WHAT IS COMPUTER MEMORY( RANDOM ACCESS MEMORY) ?

(1) रैण्डम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory)

यह मेमोरी चिप की तरह होती है, जो मैटल ऑक्साइड सेमीकण्डक्टर (MOS) से बनी होती है। इसे संक्षेप में रैम (RAM) कहा जाता है। रैम में उपस्थित सभी सूचनाएँ अस्थाई होती हैं और जैसे ही कम्प्यूटर की विद्युत सप्लाई बन्द कर दी जाती है, वैसे ही समस्त सूचनाएँ नष्ट हो जाती हैं अर्थात् रैम एक वॉलेटाइल (Volatile) मेमोरी है। रैम का उपयोग डेटा को स्टोर करने तथा उसमें (मेमोरी मे) उपस्थित डेटा को पढ़ने के लिए किया जाता है। 
रैम दो प्रकार की होती है-

WHAT IS DYNAMIC RAM ?

(a) डायनैमिक रैम (Dynamic RAM): इसे डी रैम (DRAM) भी कहते हैं। डी रैम चिप केस्टोरेज सेल परिपथों (Circuits) में एक ट्रांजिस्टर और एक कैपेसिटर लगे होते है। 
डी रैम को बार-बार रिफ्रेश (Referesh) किया जाता है, जिसके कारण इसकी गति धीमी हो जाती है। इस प्रकार डायनैमिक रैम चिप ऐसी मेमोरी की सुविधा देता है, जिसकी सूचना बिजली बन्द करने पर नष्ट हो जाती है। 
डी रैम के अन्य उदाहरण हैं-
(i) एस डी रैम (SDRAM – Synchronous Dynamic RAM)
(ii) आर डी रैम (RDRAM - Rambus Dynamic RAM)
(iii) डी डी आर एस डी रैम (DDR SDRAM – Double Data Rate Synchronous Dynamic RAM) 
(b) स्टैटिक रैम (Static RAM): इसे एस रैम (SRAM) भी कहते हैं। इसमें डेटा तब तक संचित रहता है जब तक वियुत सप्लाई ऑन (ON) रहती है। स्टैटिक रैम मेंस्टोरेजसेल परिपथों में एक से अधिक ट्रांजिस्टर लगे होते हैं। 
एस रैम के अन्य उदाहरण हैं-

(i) नॉन-वॉलेटाइल एस रैम (Non – Volatile SRAM)(ii) स्पेशल एस रैम (Special SRAM)(iii) एसिंक्रोनस एस रैम (Asynchournous SRAM)(iv) सिंक्रोनस एस रैम (Synchournous SRAM) 

(ii) रीड ओनली मेमोरी (Read Only Memory): इसे संक्षेप में रोम  (ROM) कहा जाता है। इस मेमोरी में उपस्थित डेटा तथा निर्देश स्थाई होते हैं। जिस कारण इन्हें केवल पढ़ा जा सकता है, परन्तु इन्हें डेटा और निर्देशों में परिवर्तित करना सम्भव नहीं है। डेटा और निर्देशों के स्थाई होने के कारण कम्प्यूटर की विधुत सप्लाई बन्द होने पर भी इस चिप में भरी सूचनाएँ सुरक्षित रहती हैं अर्थात रोम नॉन-वॉलेटाइल (Non-Volatile) मेमोरी है। 

रोम के निम्न प्रकार हैं -

WHAT IS COMPUTER MEMORY |(PROM MEMORY)

(a) पी रोम (PROM): यह प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी (Progammable Read Only Memory) का संक्षिप्त नाम है। यह एक ऐसी मेमोरी है, जिसमें एक प्रोग्राम की सहायता से सूचनाओं को स्थायी रूप से स्टोर किया जाता है। पी रोम मेमोरी को भी केवल एक बार ही प्रोग्राम द्वारा भरा जा सकता है। रोम की तरह यह भी स्थायी होती है और बाद में इसे बदला नहीं जा सकता। 

WHAT IS COMPUTER MEMORY

WHAT IS COMPUTER MEMORY |(EPROM MEMORY) ?

(b) ई पी रोम (EPROM): यह इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी (Erasable Pragrammable Read Only Memory) का संक्षिप्त नाम है। यह एक ऐसी पी रोम मेमोरी है, जिसको फिर से प्रोग्राम किया जा सकता है। इसकी सूचनाओं को चिप में ही रखी गई विद्युत धारा के द्वारा स्थायी रखा जाता है। किसी ई पी रोम की सूचनाओं को अल्ट्रावॉयलेट किरणे डालकर मिटाया जा सकता है। 

WHAT IS COMPUTER MEMORY



WHAT IS COMPUTER MEMORY |(EEPROM MEMORY) ?

(c) ई ई पी रोम (EEPROM: यह इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ओनली मेमोरी (Elctrically Erasable Pragrammable Read Only Memory) का संक्षिप्त नाम है। यह एक ऐसी ई पी रोम है, जिसको फिर से प्रोग्राम करने के लिए सर्किट से हटाने और निर्माता को भेजने की आवश्यकता नहीं होती। इसे एक विशेष सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम की सहायता से कम्प्यूटर में ही प्रोग्राम किया जा सकता है। इसमें प्राय: कम्प्यूटर के कॉनफिग्रेशन से सम्बन्धित सूचनाएँ रखी जाती हैं। 

WHAT IS COMPUTER MEMORY


WHAT IS COMPUTER MEMORY ?

WHAT IS SECONDARY MEMORY ?

2. द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory)

द्वितीयक मेमोरी को बाह्य (External) या सेकण्डरी (Secondary) मेमोरी भी कहा जाता है। कम्प्यूटर की मुख्य मेमोरी बहुत महँगी होने तथा बिजली बन्द कर देने पर उसमें रखी अधिकतर सूचनाएँ नष्ट हो जाने के कारण न तो हम उसे इच्छानुसार बढ़ा सकते है और न हम उसमें कोई सूचना स्थायी रूप से स्टोर कर सकते हैं। इसलिए हमें सहायक मेमोरी का उपयोग करना पड़ता है। इसकी कीमत तुलनात्मक दृष्टि से बहुत कम और डेटा स्टोर करने की क्षमता (Capacity) बहुत अधिक होती है। इसमें ऐसी सूचनाएँ भण्डारित की जाती हैं, जिन्हें लम्बे समय तक सुरक्षित रखना हो तथा जिनकी आवश्यकता लगातार नहीं पड़ती हो।

WHAT IS CACHE MEMORY ?

कैश मेमोरी (Cache Memory)

यह एक विशेष प्रकार की मेमोरी है, जो अत्यधिक तेजी से किसी कार्य को करती है। सामान्यत: प्रोसेसर को रैम मेमोरी से कोई डेटा पढ़ने में 180 नैनो सेकण्ड का समय लग जाता है। कैश मेमोरी से बार-बार आवश्यक डेटा केवल 45 नैनो सेकण्ड में प्राप्त किया जा सकता है। कैश मेमोरी का उपयोग करने से आपके कम्प्यूटर की दक्षता काफी बढ़ जाती।केश मेमोरी प्रोसेसर और मानक डी रैम (Dram) माँडूयलों के बीच ऐ बफर के रूप में रहती हैं।नवीनतम निर्देश और उसके डेटा को कैश मेमोरी में रख दिया जाता है।जब प्रोसेसर को किसी सूचना की आवश्यकता होती है, तो सबसे पहले वह कैश मेमोरी को ही देखता है यदि सूचना कैश मेमोरी में न हो तो उसे मुख्य मेमोरी में देखा जाता है। 


यह मेमोरी कुछ चुम्बकीय उपकरणों के रूप में होती है; जैसे-मैग्नेटिक डिस्क (हार्ड डिस्क, फ्लॉपी डिस्क, मैग्नेटिक टेप आदि), आप्टिकल डिस्क (सी डी-रोम, डी वी डी आदि) एवं सॉलिड स्टेट डिस्क (फ्लैश ड्राइव आदि)। इस मेमोरी का उपयोग बैकअप के लिए किया जाता है। 
कुछ मुख्य द्वितीयक स्टोरेज युक्तियों का विवरण निम्नलिखित है-


WHAT IS FLOPPY  DISK ?

(i) फ्लॉपी डिस्क (Floopy Disk)

फ्लॉपी डिस्क एक वर्ताकार डिस्क होती हैं, जिसके दोनों और एक चुम्बकीय पदार्थ का लेप चढ़ा होता हैl यह एक प्लास्टिक के चौकोर फ्लॉपी डिस्क कवर में संरक्षित रहती है। यह तीन आकारों (Sizes) में उपलब्ध होती हैं-
8 इंच,  इंच तथा  इंच।
फ्लॉपी पर डेटा कुछ संकेन्द्रीय (Co –central), वृत्ताकार (Circular) पथों पर स्टोर किया जाता है, जिन्हें ट्रैक्स (tracks) कहते हैं। हर ट्रैक कई भागों में बँटा होता है, जिन्हें सेक्टर (Sector) कहते हैं। डिस्क को ट्रैकों और सेक्टरों में विभाजित करने की प्रक्रिया फोर्माटिंग कहलाती है। एक सेक्टर में 512 बाइटें होती हैंl 

(ii) हार्ड डिस्क (Hard Disk)


इन्हें फिक्सड डिस्क भी कहा जाता है। ये कई आकारों और क्षमताओं में उपलब्ध होती हैं। 
आधुनिक हार्ड डिस्कों की क्षमता 200 गीगाबाइट तक होती है पर्सनल कम्प्यूटरों के लिए विशेष प्रकार की हार्ड डिस्क भी उपलब्ध हैं, जिन्हें विंचेस्टर डिस्क कहा जाता है। इनकी अमत 20 गीगाबाइट से 80 गीगाबाइट तक होती है। हार्ड डिस्क  सूचनाओं को स्थायी रूप से संगृहीत करने का बहुत विश्वसनीय माध्यम है और इनका उपयोग करने की गति भी पर्याप्त होती है लेकिन ये धूल आदि के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं, जिसके कारण इनको एक डिब्बे में स्थायी रूप से बन्द रखा जाता है और सिस्टम यूनिट के भीतर लगा दिया जाता है।

(iii) मेमोरी स्टिक (Memory Stick)

मेमोरी स्टिक एक प्रकार का मेमोरी कार्ड होता है। ये एक USB आधारित मेमोरी ड्राइव है। इसका आकार 50.0 X 21.5 X 2.8 मिमी होता है तथा इसकी क्षमता (Storage Capacity) 4 मेगाबाइट से 28 गीगाबाइट तक होती है।


(iv) कॉम्पैक्ट डिस्क (Compact Disk)


यह एक विशेष प्रकार की डिस्क होती है, जिन पर डेटा प्राय: एक बार ही लिखा जाता है और फिर उसे कितनी भी बार पढ़ सकते हैं, इन पर डेटा लिखने – पढ़ने के लिए लेजर (Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation – LASER) तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इन्हें ऑप्टिकल डिस्क भी कहा जाता है। यह प्लास्टिक की बनी हुई डिस्क होती है, जिस पर दोनों ओर एल्युमिनियम की पतली परत लगी होती है। एक सी डी की भण्डारण क्षमता 680 मेगाबाइट से 800 मेगाबाइट तक होती है। इसे प्राय: 1200 किलोबाइट प्रति सेकण्ड की गति से पढ़ा जाता है। इसमें से सूचनाएँ पढ़ने के लिए जिस ड्राइव को उपयोग में लाया जाता है, उसे सी डी रोम ड्राइव कहा जाता है। आजकल ऐसी कॉम्पैक्ट डिस्कें भी उपलब्ध है, जिन पर साधारण फ्लॉपी  की तरह डेटा लिखा तथा पढ़ा जा सकता है, लेकिन उनके लिए सी डी-राइटर (CD- Writer) की जरूरत होती है। अपेक्षाकृत महँगा होने के कारण इनका प्रयोग अभी सीमित ही है। कॉम्पैक्ट डिस्कों का प्रयोग ही किया जाता है, क्योंकि सभी प्रकार के प्रोग्राम आजकल सी डी पर ही उपलब्ध होते हैं।

इसे मुख्यत: तीन भागों में बाँटा जा सकता है-

1. CD – ROM (रीड ओनली मेमोरी),
2. CD –R (रिकाडॅबल),
3. CD –RW (री-राइटेबल)। 
(v) डी वी डी (Digital Video Disc –DVD)

आजकल सी डी का एक अन्य परिकृत रूप भी प्रयोग में लाया जाता है जिसे डी वी डी (DVD) कहा जाता है। इनकी भण्डारण क्षमता 2 गीगाबाइट या अधिक भी हो सकती है। इस पर डेटा लिखने या उससे पढ़ने के लिए एक विशेष ड्राइव होती है, जिसे डी वी डी ड्राइव कहा जाता है। इसे डिजिटल वर्सेटाइल डिस्क या डिजिटल विडियो डिस्क के रूप से भी जाना जाता है, DVD का आकर कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) के समान ही होता है, लेकिन ये छ: गुना अधिक तक डेटा भण्डारण करते हैंl DVD –ROM (रीड ओनली मेमोरी) में डेटा को सिर्फ पढ़ा जा सकता है, लिखा नहीं जा सकता।DVD -R (रिकॉर्डेबल) डेटा को सिर्फ एक बार रिकॉर्ड कर सकते हैं और उसके बाद एक DVD –ROM के रूप में कार्य करते हैं। DVD-RW (री - राइटेबल) और DVD - RAM (रैण्डम एक्सेस मेमोरी) डेटा को कई बार रिकॉर्ड कर सकता है और मिटा सकता है। 

(VI) ब्लू - रे डिस्क (Blu – ray Disc – BD)


ब्लू - रे डिस्क (BD या ब्लू – रे नाम से भी प्रचलित है), एक ऑप्टिकल डिस्क संग्रहण माध्यम है, जिसे मानक DVD प्रारूप का स्थान लेने के लिए बनाया गया हैl ब्लू - रे डिस्क का नाम इसे पढ़ने में प्रयुक्त नीले – बैंगनी (Blue – Violet) लेजर से लिया गया है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग उच्च परिभाषा वाले वीडियो  (High Definition Video), प्लेस्टेशन 3 (Playstation 3), वीडियो गेम्स तथा अन्य डेटा को, संगृहीत करने के लिए किया जाता है। 

(vii) पेन/थंबा/फ्लैश ड्राइव (Pen/Thumb/Flash Drive)


फ्लैश मेमोरी डेटा स्टोरेज डिवाइस है, जिसमें एक USB (यूनिवर्सल सीरियल बस) 1.1 या 2.0 इण्टरपैनल समन्वित होता है। USB फ्लैश ड्राइव आमतौर पर हटाने योग्य और री - राइटेबल होते हैं। आकार और मूल्य की बढ़ोतरी के साथ इनकी भण्डारण क्षमता भी बढ़ती जा रही हे। USB 2.0 समर्थन वाले USB ड्राइव अधिक डेटा संग्रह कर सकते हैं और अपेक्षाकृत एक बहुत बड़े ऑप्टिकल डिस्क ड्राइव से अधिक तेजी से डेटा स्थानान्तरित कर सकते हैं और इन्हें अधिकांश अन्य सिस्टमों द्वारा पढ़ा जा सकता है। 

(viii) मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tape)  

मेग्नेटिक टेप को चुम्बकीय टेप भी कहा जाता है। ये पुरानी फाइलों का बैकअप लेने के बहुत सुरक्षित और सस्ते साधन माने जाते हैं। चुम्बकीय टेप प्लास्टिक का आधा इंच या 12. 7 मिमी चौड़ा तथा सैकड़ों व हजारों फीट लम्बा फीता होता है, जो एक चक्के (Spool) पर लिपटा रहता है। इसकी एक सतह पर किसी चुम्बकीय पदार्थ की पतली परत होती है। 
इसी परत पर चुम्बकीय चिह बनाकर डेटा लिखा जाता है। चुम्बकीय टेप काफी धीमी होती है, क्योंकि यह एक क्रमिक (Sequential) माध्यम है । इसका अर्थ यह है कि इसमें डेटा लिखने या पढ़ने का कार्य एक सिरे से दूसरे सिरे तक क्रमश: किया जाता है। हम बीच से लिखना/पढ़ना शुरू नहीं कर सकते। चुम्बकीय टेप पर डेटा पढ़ने व लिखने का कार्य टेप ड्राइव द्वारा किया जाता हैं। इसकी क्षमता 40 मेगाबाइट से 100 मेगाबाइट तक होती है। 
दोस्तों  आर्टिकल  में जाना की कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इश्क प्रयोग कहा कहा है तथा आपने जाना की कम्प्यूटर मेमोरी कितने प्रकार की होती है | दोस्तों अगर ये टॉपिक आपको अच्छा लगा तो दो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे  और अगर इस आर्टिकल में कोई दिक्कत हो तो आप निचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताये 
आपके कीमती समय के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद.................
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