WHAT IS SOFTWARE ?
दोस्तों आज के टॉपिक में हम आपको बताएँगे की सॉफ्टवेयर क्या होता है दोस्तों आज के टॉपिक में हम हार्डवेयर के जानेंगे दोस्तों सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को नियंत्रित करता है सॉफ्टवेयर में कोई प्रोग्राम्स होते है जिनके बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बता रहे है
हार्डवेयर क्या है ?
हार्डवेयर (Hardware)
कम्प्यूटर के वे भाग जिन्हें हम देख सकते हैं और स्पर्श कर सकते हैं अर्थात् यान्त्रिक, विद्युत तथा इलेक्ट्रानिक भाग कम्प्यूटर हार्डवेयर के नाम से जाने जाते हैं। कम्प्यूटर हाडवइयर को ही कम्प्यूटर के भाग के नाम से जाना जाता है।
What is software in Computer ?
कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर क्या है?
What is software in Computer ?
कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर क्या है?
सॉफ्टवेयर क्या है ( WHAT IS SOFTWARE ) ?
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WHAT IS SOFTWARE || |
WHAT IS SOFTWARE ||
सॉक्टवेयर (Software)
सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए निर्देशों अर्थात् प्रोगामों की वह श्रंखला है, जो कम्पूटर सिस्टम के कार्यों को नियन्त्रित करता है तथा कम्पूटर के विभिन्न हार्डवेयरों के बीच समन्वय स्थापित करता है, ताकि किसी विशेष कार्य को पूरा किया जा सके। इसका प्राथमिक उद्देश्य डेटा को सूचना में परिवर्तित करना है। सॉफ्टवेयर के निर्देशों के अनुसार ही हार्डवेयर कार्य करता है। इसे प्रोग्रामों का समूह भी कहते हैl
दूसरे शब्दों में, “कम्प्यूटरों में सैकड़ों की संख्या में प्रोग्राम होते हैं, जो अलग-अलग कार्यों के लिए लिखे या बनाए जाते हैं। इन सभी प्रोग्रामों के समूह को सम्मिलित रूप से ‘सॉफ्टवेर’ कहा जाता हैl”
सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है ( How many types of software are ? )
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| सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते है |
WHAT IS SOFTWARE And How Many Types Of Software ?
सॉफ्टवेयर के प्रकार (Types of Software)
सॉफ्टवेयर को उसके कार्यो तथा संरचना के आधार पर दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है-
1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
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| सिस्टम सॉफ्टवेयर |
जो प्रोग्राम कम्प्यूटर को चलाने, उसको नियन्त्रित करने, उसके विभिन्न भागों की देखभाल करने तथा उसकी सभी क्षमताओं का अच्छे से उपयोग करने के लिए लिखे जाते हैं, उनको सम्मिलित रूप से 'सिस्टम सॉफ्टवेयर' कहा जाता है। कम्प्यूटर से हमारा सम्पर्क या संवाद सिस्टम सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही हो पाता है। दूसरे शब्दों में कम्प्यूटर हमेशा सिस्टम सॉफ्टवेयर के नियन्त्रण में ही रहता है, जिसकी वजह से हम सीधे कम्प्यूटर से अपना सम्पर्क नहीं बना सकते।
सिस्टम सॉफ्टवेयर में वे प्रोग्राम शामिल होते हैं, जो कम्प्यूटर सिस्टम को नियन्त्रित (Control) करते हैं और उसके विभिन्न भागों के बीच उचित तालमेल बनाकर कार्य कराते हैं।
(i) ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
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| ऑपरेटिंग सिस्टम |
इसमें वे प्रोग्राम शामिल होते हैं जो कम्प्यूटर के विभिन्न अवयवों के कार्यो को नियन्त्रित करते हैं, उनमें समन्वय स्थापित करते हैं तथा उन्हें प्रबन्धित (manage) करते हैं। इसका प्रमुख कार्य उपयोगकर्ता (User) तथा हार्डवेयर के मध्य एक समन्वय स्थापित करना है। ऑपरेटिंग सिस्टम कुछ विशेष प्रोग्रामों का ऐसा व्यवस्थित समूह हे, जो किसी कम्प्यूटर के संपूर्ण क्रियाकलापों को नियन्त्रित रखता है। ऑपरेटिंग सिस्टम आवश्यक होने पर अन्य प्रोग्रामों को चालू करता है, विशेष सेवाएँ देने वाले प्रोग्रामों का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है और उपयोगकर्ताओं की इच्छा के अनुसार आउटपुट निकालने के लिए डेटा का प्रबन्धन करता है। उदाहरण, एम एस डांस, विण्डोज XP/2000/98, यूनिक्स, लाइनेक्स इत्यादि ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ उदाहरण हैं।
(ii) डिवाइस ड्राइवर (Device Driver):-
ये एक विशेष प्रकार का सॉफ्टवेयर होते हैं, जो किसी युक्ति (Device) के प्रचालन (Operation) को समझाते हैं। ये सॉफ्टवेयर किसी युक्ति तथा उपयोगकर्ता के मध्य इण्टरफेस (Interface) का कार्य करते हैं। किसी भी युक्ति को सुचारु रूप से चलाने के लिए चाहे वो प्रिण्टर, माउस, मॉनीटर या कीबोर्ड ही हो, उसके साथ एक् ड्राइवर प्रोग्राम जुड़ा होता है। डिवाइस ड्राइवर्स निर्देशों का ऐसा समूह होता है जो हमारे कम्प्यूटर का परिचय उससे जुड़ने वाले हाडवइयरों से करवाते हैं।
(iii) भाषा अनुवादक (Language Translate):-
ये ऐसे प्रोग्राम हैं, जो विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखे गए प्रोग्राम का अनुवाद कम्प्यूटर की मशीनी भाषा (Machine Language) में करते हैं। यह अनुवाद कराना इसलिए आवश्यक होता है, क्योंकि कम्प्यूटर केवल अपनी मशीनी भाषा में लिखे हुए प्रोग्राम का ही पालन कर सकता है।
भाषा अनुवादकों को मुख्यत: तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है-
(a) असेम्बलर (Assembler):- यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो असेम्बली भाषा (Assembly Language) में लिखे गए किसी प्रोग्राम को पढ़ता है और उसका अनुवाद मशीनी भाषा में कर देता है। असेम्बली भाषा के प्रोग्राम को सोर्स प्रोग्राम (Source Program) कहा जाता है। इसका मशीनी भाषा में अनुवाद करने के बाद जो प्रोग्राम प्राप्त होता है, उसे ऑब्जेक्ट प्रोग्राम (Object Program) कहा जाता है।
(b) कम्पाइलर (Compiler):- यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High – level Programming Language) में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है। कम्पाइलर सोर्स प्रोग्राम के प्रत्येक कथन या निर्देश का अनुवाद करके उसे मशीनी भाषा के निर्देशों में बदल देता है। प्रत्येक उच्च स्तरीय भाषा के लिए एक अलग कम्पाइलर की आवश्यकता होती है।
(c) इण्टरग्रेटर (Interpreter):- यह किसी प्रोग्रामर द्वारा उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High – level Programming Language) में लिखे गए सोर्स प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है, परन्तु यह एक बार में सोर्स प्रोग्राम के केवल एक कथन को मशीनी भाषा में अनुवाद करता है और उनका पालन कराता है। इनका पालन हो जाने के बाद ही वह सोर्स प्रोग्राम के अगले कथन का मशीनी भाषा में अनुवाद करता है।
मूलत: कम्पाइलर और इण्टरप्रेटर का कार्य समान होता है, अन्तर केवल यह है कि कम्पाइलर जहाँ ऑब्जेक्ट प्रोग्राम बनाता है, वहीं इण्टरप्रेटर कुछ नहीं बनाता। इसलिए इण्टरप्रेटर का उपयोग करते समय हर बार सोर्स प्रोग्राम की आवश्यकता पड़ती है।
2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर उन प्रोग्रामों को कहा जाता है, जो हमारा वास्तविक कार्य कराने के लिए लिखे जाते हैं; जैसे-कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन की गणना करना, सभी लेन-देन तथा खातों का हिसाब-किताब रखना विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट छापना, स्टॉक की स्थिति का विवरण देना, पत्र-दस्तावेज तैयार करना इत्यादि।
हालाँकि आजकल ऐसे प्रोग्राम सामान्य तौर पर सबके लिए एक जैसे लिखे हुए भी आते है, जिन्हें रेडीमेड सॉफ्टवेयर (Readymade Software) या पैकेज (Package) कहा जाता है, जैसे-एम एस-वर्ड, एम एस-एक्सल, शैली, कोरल ड्रॉ पेजमेकर, फोटोशॉप आदि।
सामान्यत: एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते हैं-
(i) सामान्य उद्देश्य सॉफ्टवेयर (General Purpose Software):-
प्रोग्रामों का वह समूह, जिन्हें उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकतानुसार अपने सामान्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग में लाते हैं, सामान्य उद्देश्य के सॉफ्टवेयर कहलाते हैं; उदाहरण-ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर, स्प्रैड शीट, डेटाबेस प्रबन्धन।
(ii) विशिष्ट उद्देश्य सॉफ्टवेयर (Specific Purpose Software):-
ये सॉफ्टवेयर किसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु बनाए जाते हैं। इस प्रकार के सॉफ्टवेयर का अधिकांशत: केवल एक उद्देश्य होता है। सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले कुछ विशिष्ट उद्देशय सॉफ्टवेयर निम्न है-
(a) इन्वैंट्री मैनेजमेण्ट सिस्टम एण्ड पर्चेजिंग सिस्टम (Inventory Management System and Purchasing System)
(b) पेरोल मैनेजमेण्ट सिस्टम (Payroll Management System)
(c) होटल मैनेजमेण्ट सिस्टम (Hotel Management System)
3. सिस्टम यूटिलिटीज (System Utilities)
ये प्रोग्राम कप्यूटर के रख-रखाव से सम्बन्धित कार्य करते हैं। ये प्रोग्राम्स कम्प्यूटर के कार्यों को सरल बनाने, उसे अशुद्धियों से दूर रखने तथा सिस्टम के विभिन्न सुरक्षा कार्यों के लिए बनाए जाते है। यूटिलिटी प्रोग्राम कई ऐसे कार्य करते हैं, जो कम्पूटर का उपयोग करते समय हमे कराने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए, कोई यूटिलिटी प्रोग्राम हमारी फाइलों का बैकअप किसी बाहरी भण्डारण साधन पर लेने का कार्य कर सकता है।
कुछ यूटिलिटी सॉफ्टवेयर निम्न हैं-
(i) डिस्क कम्प्रेशन (Disk Compression):- ये हार्ड डिस्क पर उपस्थित सूचना पर दबाव डालकर उसे संकुचित (Compressed) कर देता है, ताकि हार्ड डिस्क पर अधिक-से-अधिक सूचना स्टोर किया जा सके। यह यूटिलिटी स्वयं अपना कार्य करती रहती है तथा जरूरी नहीं कि उपयोगकर्ता को इसकी उपस्थिति की जानकारी हो।
(ii) डिस्क फ्रेग्मेण्टर (Disk Fragmentar):-
यह कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क पर विभिन्न जगहों पर बिखरी हुई फाइलों को खोजकर उन्हें एक स्थान पर लाता है। इसका प्रयोग फाइलों तथा हार्ड डिस्क की खाली पड़ी जगह को व्यवस्थित करने में होता है।
(iii) बैकअप यूटिलिटीज (Backup Utilities):- यह कम्प्यूटर की डिस्क पर उपस्थित सारी सूचना की एक कॉपी रखता है तथा जरूरत पड़ने पर कुछ जरूरी फाइलें या पूरी हार्ड डिस्क की सामग्री वापस रिस्टोर (Restore) कर देता है।
(iv) डिस्क क्लीनर्स (Disk Cleaners):- ये उन फाइलों को ढूँढ़कर डिलीट (Delete) करता है, जिनका बहुत समय से उपयोग नहीं हुआ है। इस प्रकार ये कम्प्यूटर की गति को भी तेज करता है।
(v) एण्टी वायरस स्कैनर्स एण्ड रिमूवर्स (Anti – Virus Scanners and Removers):-
ये ऐसे यूटिलिटी प्रोग्राम्स हैं, जिनका प्रयोग कम्प्यूटर के वायरस ढूँढने और उन्हें डिलीट करने में होता है।
दोस्तों आज आपने सीखा की हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्या होते है अगर आपको ये टॉपिक अच्छा लगा हो तो आप इसे शेयर जरूर करिये और अगर आपको इसमें कोई प्रॉब्लम दिखाई दे रहा हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और यदि आपको कोई और टॉपिक के बारे में जानना हो तो कमेंट में बताये हम जल्द ही उस टॉपिक पर आर्टिकल लिखने की कोसिस करेंगे आपके कीमती समय के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। ............................... CAREER CREATION











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